बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

तेरे बिना

सोच रहा हूँ
कैसे कहूँ मैं
कह दूँ या फिर
चुप ही रहूँ मैं
कि तेरे बिना जीना मुमकिन नहीं
कि तेरे बिना मेरा कोई दिन नहीं
कि तेरे बिना जीना मुमकिन नहीं
कि तेरे बिना मेरा कोई दिन नहीं
मेरी साँसें तेरे नाम
तुझसे मेरे सुबह शाम
इक तू ही तो है
धड़कन दिल की
तुझमें मेरी रूह बसी है
तुझमें बसी है मेरी जान
और भला मैं
कैसे बताऊँ
तुझको दिल मैं
चीर दिखाऊँ
कि तेरे बिना जीना मुमकिन नहीं
कि तेरे बिना मेरा कोई दिन नहीं
कि तेरे बिना जीना मुमकिन नहीं
कि तेरे बिना मेरा कोई दिन नहीं
कैसे गुज़ारूँ
मैं दिन रात
तेरे बिन मेरे
क्या हालात
जैसे धड़कन रुक सी गयी हों
जैसे साँसें थम सी गयी हों
हर लम्हा मैं रोता हूँ
तेरी यादों में होता हूँ
ज़िन्दगी तेरे साथ गुज़ारूँ
हर पल तेरा नाम पुकारूँ
कि तेरे बिना जीना मुमकिन नहीं
कि तेरे बिना मेरा कोई दिन नहीं
कि तेरे बिना जीना मुमकिन नहीं
कि तेरे बिना मेरा कोई दिन नहीं
सोच रहा हूँ
कैसे कहूँ मैं
कह दूँ या फिर
चुप ही रहूँ मैं