बुधवार, 21 जून 2017

मुहब्बत

यूँ ही फक़त तारों को गिनना
रात का चढ़ना चाँद का ढलना
यादों में हँसना और रोना
आँखों में उजालों का चमकना
नई उम्मीद का दिल में जगना
और तुझे खोने से डरना
यही मुहब्बत है मेरी मुहब्बत
आँखों में चाहत होठों पे इबादत
यही मुहब्बत है मेरी मुहब्बत

जीना मुश्किल है तेरे बिना

जीना मुश्किल है तेरे बिना
तू क्यों मुझ से दूर पिया
जीना मुश्किल है तेरे बिना

अधरों से तेरा नाम पुकारूँ
दिन रात तेरी राह निहारूँ
लोक लाज मैं भूल गयी हूँ
तुझ से जीतूँ तुझ से हारूँ
तुझ बिन अब न लागे जिया
तू क्यों मुझ से दूर पिया
जीना मुश्किल है तेरे बिना

सूरज चाँद सितारे तुझ से
दुनिया के ये नजारे तुझ से
तुझ संग जब प्रीत लगाई
ज़िन्दगी के सहारे तुझ से
मैंने प्रेम तुझ से ही किया
तू क्यों मुझ से दूर पिया
जीना मुश्किल है तेरे बिना

सोमवार, 19 जून 2017

इश्क़

इश्क़ चढ़ता है तो उतरता ही नहीं
दिल यूँ भी कभी निखरता ही नहीं

जाने कितनी शब गुज़ार देता है यूँ
चाँद चौदहवीं जैसे संवरता ही नहीं

हर बार फिक्र में चाँद थम जाता है
तुम्हारी आह सा पिघलता ही नहीं

कितने लम्हों में इज़हार हमने किया
पहले लम्हे सा दिल तड़पता ही नहीं

यूँ तो तुम पर मरने वाले लाखों होंगे
लेकिन कोई इश्क़ सा मरता ही नहीं
     ।। हिमांशु "इश्क़" ।।