बुधवार, 2 मार्च 2016

गाँव

ऐ खुदा आज फिर सुला मुझे पीपल की छाँव में

आख़िरी वक़्त है ले जा मुझे मेरे गाँव में

जहाँ हर दिन मैने मिट्टी संग गुज़ारा

जहाँ शाम ढले हर रोज माँ ने पुकारा

बापू के कांधे ने ऊँचाइयों से मिलाया

दादी की कहानी ने बड़े प्यार से सुलाया

जाने कितनी सर्दी गुज़ारी मैने अलाव में

आख़िरी वक़्त है ले जा मुझे मेरे गाँव में

इक दिन कुछ ख्वाब अधूरे छोड़े थे

जब मैने ये पाँव शहर को मोड़े थे

खेत खलिहान तब सारा दिन रोए थे

पनघट झूले ये सब भी गुमसुम होए थे

सारी उमर मैं बस पैसा कमाता रहा

अपनी मिट्टी को खुद से ही भुलाता रहा

शहरी ज़िंदगी निकली खुशी के अभाव में

आख़िरी वक़्त है ले जा मुझे मेरे गाँव में
                    -इश्क़





तूने साथ देकर

तूने साथ देकर मेरी साँसों को थाम लिया

जीना आ गया मुझे जब भी तेरा नाम लिया

वो रंजोगम के बादल भी अब दूर हो गये 

जब से आई है तू दिल में हम मगरूर हो गये

मुस्कुरा कर तूने अब मुझको आराम दिया

जीना आ गया मुझे जब भी तेरा नाम लिया

तन्हाई मेरे दिल की अब ना जाने कहाँ खो गयी

मुहब्बत भरी तेरी अँखियां मेरा जहाँ हो गयी

कुछ इस तरह से मुहब्बत ने अपना मुकाम किया

जीना आ गया मुझे जब भी तेरा नाम लिया

शोखियां तेरी मुहब्बत की अब से मेरी अदा है

मेरी रूह बनकर अब कहाँ तू मुझसे जुदा है

तू है मेरी जान तुझे मैंने ज़िंदगी मान लिया

जीना आ गया मुझे जब भी तेरा नाम लिया

तूने साथ देकर मेरी साँसों को थाम लिया

जीना आ गया मुझे जब भी तेरा नाम लिया 

बेइमान साजन

बावरे नैना उनको खोजें

जिनको हमरी खबर नही है

हमरी मुहब्बत उनके लिए है

जिनपर हमरा असर नही है

हमरे साजन बड़े बेईमान हुए

वो हमरे दिल की जान हुए

हमरे साजन बड़े बेईमान हुए

आवत जावत ताकते रहते

अपनी नज़रिया बाँटते रहते

हाल वो हमरा पूछें कभी ना

वो हमें चाहे बोलें कभी ना

उनके लम्हे उनके नगमे

उनके किस्से उनके सपने

वो हमरे दिल की जान हुए

हमरे साजन बड़े बेईमान हुए

वो हमरे दिल की जान हुए

हमरे साजन बड़े बेईमान हुए

नगरी नगरी घूमें साजन

मैं तो चाहूं उनकी बिछावन

उनके लिए मैं हो गयी जोगन

कब आएँगे वो मेरे मोहन

मैं उनके दरसन की प्यासी

उनके बिन मैं हो गयी आधी

वो हमरे दिल की जान हुए

हमरे साजन बड़े बेईमान हुए

रटन लगी है अब साजन की

सारी दुनिया को भुलावै

प्रेम रंग है इतना गहरा

जो लगे सो निकल ना पावै

हमरे साजन हैं खिवैया

मझधार मे पार लगावै

वो हमरे दिल की जान हुए 

हमरे साजन बड़े बेईमान हुए

अलविदा

ये रुखसती का वक़्त है, मुझे हँसकर विदा करो

जो मुझे पसंद नहीं, इन अश्कों को जुदा करो

चलता हूँ मैं की अब सफ़र पूरा हुआ है

ख्वाब जो भी था मेरा वो अधूरा हुआ है

माँगा था तेरा साथ मैने ज़िंदगी की तरह

आज फिर दोनो तरफ से धोखा हुआ है

कोई दर्द नही है आज मुझको सुकून है

ये मौत भी मुझको आज दिल से कबूल है

जब कभी आऊँ मैं याद तो मुस्कुरा देना

उन दो चार पलों को हसकर बिता देना

सोच लेना कि मैं कहीं खो गया हूँ

मौत से वफ़ा करके उसका हो गया हूँ

अब चलूँ की वक़्त भी ढलने लगा है

मेरी ज़िंदगी का चाँद अब पिघलने लगा है

चलता हूँ मैं होकर अब तुमसे जुदा

आख़िरी बोल हैं मेरे तुम्हारे लिए

अलविदा अलविदा अलविदा

ज़िंदगी

ज़िंदगी से मैं हार गया मौत भी मुझसे जीत गयी

बाकी जो थी मेरी साँसें जाने कैसे बीत गयी

माँगी थी जो चंद साँसें सोचा साथ निभाएँगी

मालूम ना था बेवफा हैं मुझको वो ठुकराएँगी

सुनकर ज़ख़्मो की कहानी दर्द भी आज शर्मिंदा है

सोच रही है दुनिया सारी इस हाल में कैसे ज़िंदा है

जबसे हुए हैं अपने पराए अपनो की भी प्रीत गयी

बाकी जो थी मेरी साँसें जाने कैसे बीत गयी

लड़की चाँद जैसी

वो लड़की चाँद जैसी है

मेरे दिल में जो रहती है

उसे बस देखता हूँ मैं

उसी को पूजता हूँ मैं

वो मेरा दिल मेरी धड़कन
वो मेरी रूह मेरा जीवन
जुदा उससे जो हो जाऊँ
बिना उसके ना जी पाऊँ
हसीन जज़्बात जैसी है
मेरे दिल में जो रहती है
वो लड़की चाँद जैसी है
मेरे दिल में जो रहती है

मिली जबसे है वो मुझको
मैं बस मुस्काता रहता हूँ
उसकी हर अदा में मैं
खुदा को पाता रहता हूँ
हर ख्वाहिश में उसे चाहा
दुआओं में बस उसे माँगा
ज़िंदगी की वो राहत है
मस्त बरसात जैसी है
मेरे दिल में जो रहती है
वो लड़की चाँद जैसी है
मेरे दिल में जो रहती है

वो पगली इक पवन सी है
कोई भोली ग़ज़ल सी है
वो चंचल है ख्यालों सी
वो खूबसूरत है ख्वाबों सी
वो परियों की कोई रानी है
कोई दिलकश कहानी है
समंदर सी वो है शरमाती
मीठी मुलाक़ात जैसी है
मेरे दिल में जो रहती है

वो लड़की चाँद जैसी है
मेरे दिल में जो रहती है

अच्छा लगता है

कभी खामोश रहना अच्छा लगता है

कभी कुछ भी कहना अच्छा लगता है

कभी अच्छा लगता है तेरी याद मे हसना

कभी तन्हाई में रोना अच्छा लगता है

कभी कोई अहसास मुझे जब तेरा सताता है

ये दिल चुपके से तेरी यादों मे खो जाता है

कभी कोई आहट तुझे मेरे करीब लाती है

कभी याद करके तुझे ये आँख भर आती है

तेरे पहलू में सर रखकर सोना अच्छा लगता है

दुनिया भुलाना और तुझमें खोना अच्छा लगता है

तेरे साथ रोज़ सपने बनाना अच्छा लगता है

तेरे साथ मुझे ज़िंदगी बिताना अच्छा लगता है

चल उड़ चलिए

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

चल उड़ चलिए अब कोई ठिकाना

बदला सा लगने लगा ये ज़माना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

रिश्ते नाते सब रूठ गये हैं

सारे साथी कहीं छूट गये हैं

अपने घरोंदे अब टूट गये हैं

गुज़र गया हैं अब मौसम पुराना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

हीरें भी रोई रांझे भी रोए

किस्से मुहब्बत के अब खोए

कौन सुनाएगा अब ये अफ़साना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

यारी सबसे छूट रही है

वो पगडंडी टूट रही है

बंद हुआ है मेलों में जाना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

पनघट पे आके मिलना मिलाना

मंदिर की पूजा वो अज़ान सुनाना

ताजिए बनाना वो झाँकी सजाना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए 

कि अब ये देस हुआ बेगाना

कोई लम्हा फिर से आए

इस दूरी को फिर से मिटाए

उस पार अपनों के गले लग जाएँ

रूठे हुओं को अब फिर से मनाएँ

फिर से वो होली ईद दीवाली

आँखों को हम कर दें खाली

बंद करो अब नफ़रत के खेले

फिर से लगाओ यारी के मेले

अपनों से जो हम दूर हुए थे

कितने हम यूँ मजबूर हुए थे

दौलत हमारी सारी ले लो

गुज़रे ज़माने वापस दे दो

मिट गये रांझे मर गयीं हीरें

ख़त्म करो अब सारी लकीरें 

फिर से हम उस घर मे जाएँ

अपना बचपन जहाँ छोड़ आए

बाँट दिया था तुमने सबको

बाँटा देस और बाँटा रब को

चलो हम फिर से एक हो जाएँ

बुजुर्गों से लाखों दुआएँ पाएँ

फिर से साथ खेतों में जाएँ

टूटी पगडंडी फिर से बनाएँ

साथ में मिलकर बस ये गाएँ

गाते ही जाएँ बस गाते हीं जाएँ

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए 

ले चलिए मुझे देस पुराना

ले चलिए मुझे देस पुराना

क्यूँ हो गए जुदा

क्यूँ अपना बना के

क्यूँ ख्वाब दिखा के

क्यूँ हो गये जुदा

क्यूँ हो गये खफा

क्यूँ तन्हा बना के

क्यूँ मुझे ठुकरा के

क्यूँ हो गये जुदा

क्यूँ हो गये खफा

क्यूँ हो गये जुदा

क्या मेरी ये खता थी

जो मेरी वफ़ा थी

तुझको ही मैंने चाहा

तू मेरी हर दुआ थी

कैसे कहूँ तुझे बेवफा

क्यूँ हो गये जुदा

क्यूँ हो गये खफा

मुहब्बत वाली राहें

वो मेरी सदाएँ

तुझको ही पुकारा

दुआओं में भी माँगा

क्यूँ बंजर हुआ अब ये

दिल मेरा हाय

कैसे जियूंगा मैं

तू ही ये बताए

कैसी चली हवा

क्यूँ हो गये जुदा

क्यूँ हो गये खफा

मेरे पास चले आया करो

इन दूरियों को कभी तो तुम मिटाया करो

जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो

यूँ ना मेरी बेकरारी को तुम आजमाया करो

जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो

कभी जब तन्हाई में मुझे तुम्हारा सहारा मिला

तो लगा कि दरिया-ए-दिल को किनारा मिला

जैसे मेरे जज़्बातों को तुमसे मिली मंज़िल कोई

जैसे मिल गया हो मेरी तन्हाई को हाँसिल कोई

अब ना ख़ामोश रहकर मुझे यूँ तडपाया करो

जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो

हर दर्द से जीता हूँ मैं ये दिल तुमपर हारकर

कोई और चाहत नहीं मेरी तुम्हें ज़िंदगी मानकर

हर किसी पर किए ज़िंदगी ने लाखों सितम

हालातों ने भी यहाँ नवाज़ें हैं सभी को गम

इन हालातों के आगे तुम ना टूट जाया करो

जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो

हम दोनों ने ज़िंदगी मे बेपनाह अश्क़ बहाए थे

शायद ही कोई लम्हा हम दिल से मुस्कुराए थे

थामा है तुम्हारा हाथ ज़िंदगी भर निभाने के लिए

आया हूँ मैं अब तुम्हें कभी ना छोड़ जाने के लिए 

मेरी बाहों मे आकर तुम सारे गम भूल जाया करो

जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो

इन दूरियों को कभी तो तुम मिटाया करो

जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो

तुम ना हो तो

तुम ना हो तो अब दिल मेरा ये लगता ही नहीं

तुम जो हो तो मुझे कुछ और दिखता ही नहीं

हाल मेरा कुछ है ऐसा कि मैं दीवाना हो गया

सारी दुनिया से अब दिल ये मेरा बेगाना हो गया

दुनिया चाहे अब कुछ भी कह ले

दुनिया चाहे अब कुछ भी कर ले

उनके कहने से मुझे कोई फ़र्क पड़ता ही नहीं

तुम ना हो तो अब दिल मेरा ये लगता ही नहीं

ज़िंदगी और कुछ नहीं बस तुम्हारा नाम है

तुम्हारी राहें ताकते रहना अब मेरा काम है

धड़कन रूठे उसका मुझको गम नहीं

साँस छूटे उसका मुझको गम नहीं

बिना तुम्हारे मैं एक लम्हा भी जी सकता ही नही

तुम ना हो तो अब दिल मेरा ये लगता ही नहीं

हकीकत ए इश्क़

ज़िंदगी तमाम होने आई पर मुक़द्दर ये समझ ना पाया

हर उस शख़्स ने धोखा दिया जिससे भी मैने दिल लगाया

सुना है मैनें किस्मत से मिलती है मुहब्बत सभी को

इस कम्बख़्त मुहब्बत ने मुझे हर कदम पर ठुकराया

जब दौलत लेकर खोजने गया तो मिले मुझे यार बहुत

जब वफ़ा की ख़्वाहिश की तो मैं खुद बेवफा कहलाया

कहते हैं आईना दिखा देता है हर चेहरे की हक़ीकत

आज यहाँ हर शख़्स ने आईने पर इल्ज़ाम लगाया

मुस्कुराहट भी रोई जब भी टूटा यहाँ दिल किसी का

पुराने ज़ख़्म भुलाने के लिए हर बार नया दर्द लगाया

पत्थर बना कर इंसान को तू तो हंसता होगा हर रोज

क्या चाह भी तेरी थी जो तूने हम सबको बेबस बनाया

ए खुदा, दर्द भी तू दे हमें फिर दुआ भी हम तुझसे करें

हर दिन हर पल हर कदम मैनें भी तुझे आजमाया

जो चाहे सज़ा दे दे मुझे मंजूर है अब सब कुछ

देखी है मैनें तेरी खुदाई कई बार ओ मेरे ख़ुदाया

वो होंगे कोई और जो करते हैं तेरे आगे सजदा

कूचा ए इश्क़ में मैनें हर बार अपना सिर झुकाया.