सो रहा है मुल्क ये इसको जगाना चाहिए
सारी दुश्मनी को अब तो मिटाना चाहिए
अब किसी घर में भी भूखा न सो पाये कोई
पड़ोसियों का फ़र्ज़ सबको निभाना चाहिए
जो सोचते हैं नफरतों से जीत जाएँ कुर्सियां
दे के धक्का शैतानों को नीचे गिराना चाहिए
बहक गए कुछ लोग आकर फरेबी बातों में
बेहतर है कि उनको हक़ीक़त दिखाना चाहिए
छीन कर आज ये हथियार बच्चों के हाथ से
किताबें थमा के उनको स्कूल पहुँचाना चाहिए
बात नफरतों की करना भी अब यहाँ गुनाह हो
कुछ इस तरह मुल्क में मुहब्बत फैलाना चाहिए
खफा हो जो चले गए अपने घरों को छोड़कर
परिंदों को वापस यूँ घोंसलों में बुलाना चाहिए
चाहे हिन्दू रहे मुस्लिम रहे या कोई भी जात हो
भूख जब लगती है तो सबको निवाला चाहिए
जो बन गए दहशतगर्द खुदा की राह छोड़कर
सच्चा मजहब है क्या उनको समझाना चाहिए
दुश्मन तैयार है आज हमको मिटाने के वास्ते
होकर एक हिन्द अब दुश्मन को मिटाना चाहिए
जब कोई है पूछता हमसे हमारा मजहब यहाँ
चीर कर के दिल उसको तिरंगा दिखाना चाहिए