मंगलवार, 31 मई 2016

सो रहा है मुल्क

सो रहा है मुल्क ये इसको जगाना चाहिए
सारी दुश्मनी को अब तो मिटाना चाहिए

अब किसी घर में भी भूखा न सो पाये कोई
पड़ोसियों का फ़र्ज़ सबको निभाना चाहिए

जो सोचते हैं नफरतों से जीत जाएँ कुर्सियां
दे के धक्का शैतानों को नीचे गिराना चाहिए

बहक गए कुछ लोग आकर फरेबी बातों में
बेहतर है कि उनको हक़ीक़त दिखाना चाहिए

छीन कर आज ये हथियार बच्चों के हाथ से
किताबें थमा के उनको स्कूल पहुँचाना चाहिए

बात नफरतों की करना भी अब यहाँ गुनाह हो
कुछ इस तरह मुल्क में मुहब्बत फैलाना चाहिए

खफा हो जो चले गए अपने घरों को छोड़कर
परिंदों को वापस यूँ घोंसलों में बुलाना चाहिए

चाहे हिन्दू रहे मुस्लिम रहे या कोई भी जात हो
भूख जब लगती है तो सबको निवाला चाहिए

जो बन गए दहशतगर्द खुदा की राह छोड़कर
सच्चा मजहब है क्या उनको समझाना चाहिए

दुश्मन तैयार है आज हमको मिटाने के वास्ते
होकर एक हिन्द अब दुश्मन को मिटाना चाहिए

जब कोई है पूछता हमसे हमारा मजहब यहाँ
चीर कर के दिल उसको तिरंगा दिखाना चाहिए

                                       

शुक्रवार, 6 मई 2016

दर्द

ऐ दर्द चल तुझे आज पुकार लूँ
मेरी तन्हाई को थोड़ा सँवार लूँ
वक़्त नादाँ है कभी रुक नहीं पाता
तन्हा होकर मैं ज़िन्दगी गुजार लूँ

एहसास तेरे होने का काम ना आया
हर इक ख़ुशी ने मुझे इतना सताया
ज़िन्दगी ने आँसू मुझे दिए कई बार
हर क़दम अपनों से ही धोखा खाया
आज मौत से जरा वफ़ा उधार लूँ
मेरी तन्हाई को थोड़ा सँवार लूँ

फूल भी अब नश्तर चुभाने लगे हैं
लोग अब मुहब्बत भुलाने लगे हैं
बारिश की ज़मीं है ये और कुछ नहीं
दिल में अश्क़ों के बादल छाने लगे हैं
उनकी आहट जो जीना सिखाती थी
जाते हुए आज वो रुलाने लगे हैं
रोते हुए उनका नाम बार बार लूँ
मेरी तन्हाई को थोड़ा सँवार लूँ
ऐ दर्द चल तुझे आज पुकार लूँ