शनिवार, 25 नवंबर 2017

राम भरोसे

अंधे लड़ने को तैयार
गूंगे चला रहे सरकार
चलो भई राम भरोसे
वो सत्ता के ठेकेदार
क़त्ल करने को तैयार
चलो भई राम भरोसे

उनके हाथ में ताक़त है
अपनी भी खिलाफत है
हम सच के साथ खड़े
उनके लिए बग़ावत है
सत्ता ही है मंज़िल उनकी
जनता है बस सीढ़ी भाई
राम नाम की लूट मचा के
बन गए धर्म के पहरेदार
चलो भई राम भरोसे

उन्नति की बातें हैं उनकी
अवनति वो देश की करते
ईमानदारी भी मरी पड़ी है
सच्चाई भी कहीं गढ़ी है
रेडियो उनका टीवी उनकी
सभी जगह मिट्टी पड़ी है
तिरंगे को भी बनाया है
हत्यारों ने अब हथियार
चलो भई राम भरोसे

गाँधी के इस मुल्क की देखो
कैसी हालत आज बनाई
जिनको रक्षा सौंपी हमने
उन लोगों ने आग लगाई
मरते हिन्दू और मुसलमान
चलती नेता जी की दुकान
खुद तो बन जाते हैं महान
देश का कर दिया बंटाधार
चलो भई राम भरोसे
चलो भई राम भरोसे

लिख दूँ


क्या इश्क़ का सैलाब लिख दूँ मैं
या फिर कोई इंक़लाब लिख दूँ मैं

तमाम नफरतों को कर के रुसवा
मुहब्बत की इक किताब लिख दूँ मैं

बड़ा मुश्किल है यादों को संभालना
पन्नों में छिपा के गुलाब लिख दूँ मैं

दरिया में उतरता और चढ़ता रहा
मेरे इन अश्क़ों को आब लिख दूँ मैं

ज़िन्दगी गुलज़ार हो गयी तुझ से
तेरे चेहरे को आफ़ताब लिख दूँ मैं

जब भी देखूँ नशे में डूब जाता हूँ
तेरी आँखों को शराब लिख दूँ मैं

रोज तुझे पाने की नयी जद्दोज़हद
मुहब्बत में ये हिसाब लिख दूँ मैं