शुक्रवार, 6 मई 2016

दर्द

ऐ दर्द चल तुझे आज पुकार लूँ
मेरी तन्हाई को थोड़ा सँवार लूँ
वक़्त नादाँ है कभी रुक नहीं पाता
तन्हा होकर मैं ज़िन्दगी गुजार लूँ

एहसास तेरे होने का काम ना आया
हर इक ख़ुशी ने मुझे इतना सताया
ज़िन्दगी ने आँसू मुझे दिए कई बार
हर क़दम अपनों से ही धोखा खाया
आज मौत से जरा वफ़ा उधार लूँ
मेरी तन्हाई को थोड़ा सँवार लूँ

फूल भी अब नश्तर चुभाने लगे हैं
लोग अब मुहब्बत भुलाने लगे हैं
बारिश की ज़मीं है ये और कुछ नहीं
दिल में अश्क़ों के बादल छाने लगे हैं
उनकी आहट जो जीना सिखाती थी
जाते हुए आज वो रुलाने लगे हैं
रोते हुए उनका नाम बार बार लूँ
मेरी तन्हाई को थोड़ा सँवार लूँ
ऐ दर्द चल तुझे आज पुकार लूँ

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