मंगलवार, 4 अगस्त 2020

लोकतंत्र बचाओ

देश बदलना बहुत मुश्किल लगता है न? लेकिन बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। अगर आप चाहेंगे तो बहुत कुछ अच्छा हो सकता है। उसके लिए किसी का खून नहीं बहाना है। न ही दंगे करने हैं। न ही किसी तरह के तमाशे। बस हमें लोकतंत्र को ताकतवर बनाना होगा। 

अब आपका सवाल होगा कि लोकतंत्र को कैसे ताकतवर बनाएंगे? बहुत आसान है इसका जवाब। लोकतंत्र ताकतवर बनता है सवाल पूछ कर। चाहे सरपंच हो या प्रधानमंत्री। सब से सवाल पूछिये। उनको टोकिये। गलत करने पर रोकिए। पुरजोर आवाज़ उठाइए। सवाल ही लोकतंत्र को मजबूती देते हैं। जैसे आप घर के किसी सदस्य से पैसे का हिसाब या काम का हिसाब लेते हैं वैसे ही इन नेताओं से भी लीजिये। देखना फिर बहुत कुछ बदल जायेगा। 

एक काम और करना होगा आपको। जनप्रतिनिधियों पर एक कानून बनाने के लिए दबाव डालना होगा। वो कानून आपके लिए नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए ज़रूरी होगा। उस कानून में निम्न प्रावधान सुनिश्चित होने चाहिए :- 

1. सरपंच, पार्षद, विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री सभी का इलाज सरकारी अस्पतालों में होना चाहिए। उनके परिवारों का इलाज भी सरकारी अस्पतालों में होना चाहिए। ये सरकारी अस्पताल उनके क्षेत्र के होने चाहिए। स्थिति गंभीर होने पर ही अपने ही राज्य के बड़े सरकारी अस्पतालों में उन्हें रैफर किया जाए। 

2. सरपंच से लेकर प्रधानमंत्री तक के सभी जनप्रतिनिधियों के लिये सख़्त नियम होना चाहिए कि वो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल अथवा कॉलेज में ही शिक्षा प्रदान करें। सरकारी कॉलेज न होने की स्थिति में मैरिट के आधार पर प्राइवेट कॉलेज में सीट अलॉट की जाए। 

3. दलबदल करने पर अगले 5 वर्षों तक किसी भी तरह का चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगनी चाहिए। साथ ही दूसरे दल में किसी भी पद पर उनकी पदस्थापना पर सख्त रोक लगनी चाहिए। अगले 5 वर्षों तक वो एक साधारण कार्यकर्ता की तरह दूसरे दल में काम करें। 

4. जनप्रतिनिधियों को उनके मूल व्यवसाय से इस्तीफा देकर ही जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य को मान्य किया जाए। यदि मूल व्यवसाय नहीं छोड़ें तो उन्हें हमेशा के लिए अयोग्य माना जाए। क्योंकि जनप्रतिनिधियों को सरकारी तनख्वाह एवं अन्य खर्च मिलते हैं। 

5. कोई भी केस साबित होने पर उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगे। जनप्रतिनिधियों के जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने पर भी रोक लगे। एक आम आदमी जेल में रहते हुए वोट नहीं डाल सकता फिर कोई जेल में रहकर चुनाव कैसे लड़ सकता है। 

6. सरकारी पद पर आसीन कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी अपने पद से इस्तीफा देकर 5 वर्ष बाद ही चुनाव लड़े। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकेगी। 

7. जनप्रतिनिधियों की आमदनी का प्रत्येक 6 माह में ऑडिट किया जाए। साथ ही उनके परिवारीजनों की आय का भी ऑडिट किया जाए। जिसके ऑडिट में तारतम्य न हो उसे नोटिस देकर जवाब मांगा जाए। जवाब में धन का स्त्रोत न मिलने पर सदस्यता रद्द की जाए। 

8. किसी भी तरह का चंदा पूर्णरूपेण पारदर्शी बनाया जाए। चंदा देने वालों के नाम सार्वजनिक किए जाएँ। 

9. सरकार में कैबिनेट की होने वाली प्रत्येक मीटिंग (सुरक्षा को छोड़ कर) लाइव की जाए। कुछ भी छुपा हुआ एजेंडा न रहे। 

10. जनप्रतिनिधियों के साथ रहने और घूमने वाले समर्थकों एवं राजनीतिक दल में पदाधिकारियों का पुलिस वेरिफिकेशन किया जाए और उनकी आय का भी ऑडिट किया जाए। 

11. जाति अथवा धर्म के आधार पर बने सारे संगठन एवं राजनीतिक दलों की मान्यता खत्म कर ऐसे दलों पर बैन लगाया जाए। 

12. धार्मिक नफरत फैलाने वाले बयान देने वालों की सदस्यता रद्द की जाए एवं उनको राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा चला कर सख्त सजा दी जाए। 

13. चुनाव पूर्व किये गए प्रत्येक वादे को पूर्ण करने का सख्त कानून बनाया जाए और इस प्रत्येक वर्ष जनता को हिसाब दिया जाए। यदि 70% वादे पूर्ण न हों तो उस सरकार में शामिल सभी मंत्रियों को 5 वर्ष किसी भी तरह के पद से विमुख रखा जाए। 

मुझे लगता है कि यदि इतना हो गया तो भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली और समृद्ध देश बनने से कोई नहीं रोक सकता। आप का क्या कहना है?

- हिमांशु श्रीवास्तव

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