बुधवार, 20 दिसंबर 2017

रोती रही

बेमौसम बरसात कल होती रही
हँसती रही दुनिया मैं रोती रही
खुद को अश्क़ों से भिगोती रही
हँसती रही दुनिया मैं रोती रही

लम्हा लम्हा तुझको ही याद करूँ
तुझसे मिलने की मैं फ़रियाद करूँ
तेरे साथ ही अब मेरा जीना मरना
तेरे बिन मुझको अब क्या करना
तेरे साथ के ख्वाब संजोती रही
हँसती रही दुनिया मैं रोती रही

मेरे होंठों पर तेरा ही नाम सनम
करूँ मैं तेरी बातें दिन रात सनम
तुझसे मिलने को दिल मेरा तरसे
तेरे बिन ये दिल रोये आँखें बरसे
तुझ बिन न जागी न सोती रही
हँसती रही दुनिया मैं रोती रही

बेमौसम बरसात कल होती रही
हँसती रही दुनिया मैं सोती रही

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