मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

मेरी मुहब्बत

कुछ ख़तों के जवाब लिख दूँ
आज तुमको गुलाब लिख दूँ
मैंने मुहब्बत में जो था देखा
मेरी आँखों का ख्वाब लिख दूँ

जाने कितनी रातें गुजारीं हैं
न जाने कितने दिन हैं बीते
मुहब्बत का ये खेल है ऐसा
इसमें न हम हारे न ही जीते
दिल पर नशा चढ़ने लगा है
तीखी कोई शराब लिख दूँ
कुछ ख़तों के जवाब लिख दूँ
आज तुमको गुलाब लिख दूँ

ये दुनिया है भूल भुलैया
इसमें मैं कहीं खो न जाऊँ
मुझको अब तुम ही संभालो
तुम बिन मैं अब जी न पाऊँ
आखिर कैसे तुमसे कहूँ मैं
मेरी हालत खराब लिख दूँ
कुछ ख़तों के जवाब लिख दूँ
आज तुमको गुलाब लिख दूँ
मैंने मुहब्बत में जो था देखा
मेरी आँखों का ख्वाब लिख दूँ

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