ये ठंडी ठंडी आग पड़ी है, देखो न
जाने किसकी राख पड़ी है, देखो न
जाने किसने क़लम किये लोगों के सर
जाने किसने चला दिये दिल पर खंजर
जाने किसने आग लगाई गुलशन में
जाने किसने जला दिए लोगों के घर
शहर गाँव बस्ती आग लगी है, देखो न
जाने किसकी ख़ाक पड़ी है, देखो न
हाकिम जी से कह दो थोड़ा रहम करें
अगर बची हो आँखों में तो शरम करें
ज़ख्म लगाना यूँ तो मुश्किल भी नहीं
बातें करना छोड़ अब कुछ करम करें
खामोशी में कोई बात दबी है, देखो न
जाने किसकी राख पड़ी है, देखो न
हमने तुमको हरदम ही अपना माना
हम सब से है मुल्क का ताना बाना
शांति अहिंसा साथ हमको जीना है
भाई भाई हैं हमको साथ ही रहना है
रिश्तों में जो गांठ पड़ी है, देखो न
जाने किसकी ख़ाक पड़ी है, देखो न
देखो कि अब कोई घर न जल पाये
नफ़रत की ये दाल कहीं न गल पाये
लाशों के इस ढेर में सब तो अपने हैं
भाई, बेटा, माँ, बहन कहीं मिल जाये
मुल्क़ की यहाँ लाश दबी है, देखो न
जाने किसकी ख़ाक पड़ी है, देखो न
ये ठंडी ठंडी आग पड़ी है, देखो न
जाने किसकी ख़ाक पड़ी है, देखो न
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