मुझको चैन ओ अमन वापस कर दो
मुझको गंग ओ चमन वापस कर दो
जहाँ रहते थे साथ हम सारे मिल के
मुझको मेरा वो वतन वापस कर दो
मुझको नहीं अरमान किसी जन्नत का
मुझको चाहिए मुल्क़ मेरा मुहब्बत का
करता हूँ दुआ और यही फरियाद रहे
मैं रहूँ न रहूँ मुल्क़ ये मेरा आबाद रहे
गज़लें महकें और गीत मुस्कुराए जहाँ
वो महफ़िल ओ सुखन वापस कर दो
मुझको मेरा वो वतन वापस कर दो
मंदिर में भजन मस्ज़िद में अज़ान रहे
जहाँ कान्हा के इश्क़ में रसखान रहे
जहाँ गाँधी ने अहिंसा हमें सिखाई थी
जहाँ भगत सुभाष ने क्रांति लाई थी
इंक़लाब को जिसने ज़िंदाबाद किया
शहीदों को वो नमन वापस कर दो
मुझको मेरा वो वतन वापस कर दो
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