बुधवार, 21 जून 2017

मुहब्बत

यूँ ही फक़त तारों को गिनना
रात का चढ़ना चाँद का ढलना
यादों में हँसना और रोना
आँखों में उजालों का चमकना
नई उम्मीद का दिल में जगना
और तुझे खोने से डरना
यही मुहब्बत है मेरी मुहब्बत
आँखों में चाहत होठों पे इबादत
यही मुहब्बत है मेरी मुहब्बत

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