अख़बार खरीद कर कुछ दमदार हो गये
लोग ख़बर की तलाश में बेक़रार हो गये
किसी ने सिखाया ही नहीं मुहब्बत करना
आज हर तरफ़ नफरत के बाजार हो गये
मुबारक़ हो कि आप अब बड़े सुकून में हो
ग़ुलाब बोये थे जो आज तलवार हो गये
दरकी हैं इबादतगाहें फ़िरक़ों की आग से
मज़हब के आज सरेआम कारोबार हो गये
और कुछ नहीं ये बस तख़्त की लड़ाई है
आपस में लड़ने को हम यूँ ही तैयार हो गये
काम निकलने के बाद फिर तुम ही देख लेना
जिनको अजीज़ थे उनके लिये बेकार हो गये
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