मंगलवार, 8 मई 2018

हो गये

अख़बार खरीद कर कुछ दमदार हो गये
लोग ख़बर की तलाश में बेक़रार हो गये

किसी ने सिखाया ही नहीं मुहब्बत करना
आज हर तरफ़ नफरत के बाजार हो गये

मुबारक़ हो कि आप अब बड़े सुकून में हो
ग़ुलाब बोये थे जो आज तलवार हो गये

दरकी हैं इबादतगाहें फ़िरक़ों की आग से
मज़हब के आज सरेआम कारोबार हो गये

और कुछ नहीं ये बस तख़्त की लड़ाई है
आपस में लड़ने को हम यूँ ही तैयार हो गये

काम निकलने के बाद फिर तुम ही देख लेना
जिनको अजीज़ थे उनके लिये बेकार हो गये






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें