ऐसी है दुनिया और
वैसी है दुनिया
हम से सुनो
कैसी कैसी है दुनिया
कॉफी के प्याले में
नमक का है घोल
दुनिया को किसी का
नहीं कोई मोल
दुनिया की तारीफ
हरगिज़ न करना
दुनिया के लिए
क्या जीना क्या मरना
झूठी बातें ही तो
सुनाये ये दुनिया
हम तो कहें
भाड़ में जाये ये दुनिया
बदल दो ये दुनिया
ये बेमतलब की दुनिया
वहशी फरेबी और
आरामतलब की दुनिया
इसमें मसर्रत का नहीं
कोई ठिकाना
अक्स दुनिया का हो
चुका है पुराना
इस दुनिया पर कोई
यकीं भी न करना
इस दुनिया का भरोसा
कहीं भी न करना
जब मौका मिलेगा
तो लूटेगी दुनिया
अपनी ही गलती से
ये टूटेगी दुनिया
दुनिया में कुछ भी
मुनासिब नहीं है
कुछ भी किसी के
जानिब नहीं है
अपने ही मतलब से
पूछेगी दुनिया
मतलब के बाद ये
थूकेगी दुनिया
दुनिया में पैसा ही
एक मज़हब
दुनिया पहले सी
लगती नहीं अब
इसको फ़रागत नहीं
नफ़रतों से
मुहब्बत है दुनिया को
बस तुर्बतों से
धर्मों पर अक्सर ही
लड़ती है दुनिया
झूठ कह कह कर
अकड़ती है दुनिया
दुनिया ने भगवान
तो लाखों बनाये
दुनिया ही दुनिया
में भगवान कहलाये
झूठी बातों में अक्सर
लुभाती है दुनिया
सच्चाई से भी
मुँह चुराती है दुनिया
दुनियावालों की दुनिया
में बड़ी है खराबी
किसी की कदर इसको
नहीं है ज़रा भी
देती थी जन्नत की तासीर
कभी जो
हुई है जहन्नुम की कोई
तस्वीर वो
प्यार मुहब्बत से दुनिया
करती है नफरत
लहू बहाने की लग गयी
इसको आदत
इसको बदलना अब
मुमकिन नहीं है
इसमें सुकूँ वाला
कोई दिन नहीं है
इंसानों से इसका
नहीं वास्ता कोई
शैतानों से इसका
हुआ राब्ता कोई
लाशों पर अपनी है
रोटी पकाती
शैतानों के साथ
मिल बाँट है खाती
वैसे तो मीठी सी
दिखती है दुनिया
लेकिन ज़हर सी
तीखी है दुनिया
इसमें हुक़ूमत के पास
ताकत
लहू बहाना ही जिसकी है
आदत
आपस में जबसे ये
लड़ने लगी है
दुनिया बहुत ज़्यादा
सड़ने लगी है
फालतू के अक्सर
तमाशे दिखाये
ऐसी दुनिया तो न हमें
रास आये
बेहतर है कि अब तो
मिट जाये ये दुनिया
लहूलुहान ही बस
नज़र आये ये दुनिया
ए दुनिया ओ दुनिया
तुझे याद करेंगे
तुझसा न कोई हो ये
फरियाद करेंगे
चली जा अब नज़रों से
तू दूर दुनिया
आज़ाद हैं हम
तू मजबूर दुनिया
बदल दो ये दुनिया
ये बेमतलब की दुनिया
वहशी फरेबी और
आराम तलब की दुनिया
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