तुम्हारे बस हाथ चवन्नी है
तुम्हारी औकात चवन्नी है
जितने चाहे भाषण दे दो
तुम्हारी हर बात चवन्नी है
चार आने की बातों से
तुम तमाशे दिखाते हो
लेकिन सच सामने आए
तो पीछे छुप जाते हो
तुम्हारे दिन हैं दो कौड़ी
तुम्हारी रात चवन्नी है
जितने चाहे भाषण दे दो
तुम्हारी हर बात चवन्नी है
लूट खसोट और गुंडागर्दी
ये सब काम तुम्हारे हैं
हिटलर, चंगेज तानाशाह
ये सारे नाम तुम्हारे हैं
तुम खोटे सिक्के बाजारू
तुमसे मुलाकात चवन्नी है
जितने चाहे भाषण दे दो
तुम्हारी हर बात चवन्नी है
जनता को तुम आपस में
धर्म जात पर लड़वाओगे
तुम हो नए दौर के रावण
नए रूप में वापस आओगे
तुम नेताओं की राजनीति में
शह और मात चवन्नी है
जितने चाहे भाषण दे दो
तुम्हारी हर बात चवन्नी है
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