गुरुवार, 7 जुलाई 2016

बेटी

मैं छोटी सी बच्ची हूँ हँसती खेलती गाती हूँ
कभी यहाँ तो कभी वहाँ दौड़ती भागती जाती हूँ

मम्मी की मैं हूँ लाड़ली पापा की भी परी हूँ मैं
कभी कभी तो प्यार से भैया से भी लड़ी हूँ मैं

दुनिया की सारी सुंदरता मुझमें ही तो समायी है
अपने घर की खुशियाँ मैंने ही मुस्कान से सजाई है

लेकिन कुछ शैतान आजकल मुझे क्यों सताने आते हैं
मेरी आखिर क्या गलती है जो वो मुझे रुलाने आते हैं

उनका बार बार छूना मुझको बहुत ही गन्दा लगता है
उनके आसपास रहना जैसे पिंजड़े में परिंदा लगता है

मम्मी को जब बतलाती हूँ मेरी बात नहीं समझती हैं
पापा को भी मेरी तक़लीफ़ जाने क्यूँ नहीं दिखती है

किसको अपनी व्यथा सुनाऊँ कैसे अपना दर्द दिखाऊँ
कभी कभी तो लगता है कि मैं दुनिया को ही छोड़ जाऊँ

वो शैतान हर जगह पर मुझको हमेशा ही दिखते हैं
स्कूल बाज़ार या आसपास में घूमते फिरते से लगते हैं

कभी कभी घर पर भी वो चाचा मामा बन कर आते हैं
लाड़ करने के बहाने मुझको वो गलत तरह छू जाते हैं

मम्मी गोदी में आज छुपाओ इन शैतानों से मुझे बचाओ
पापा आप तो मेरे हीरो हो इन शैतानों को मार भगाओ

इन लोगों ने दुनिया को बहुत ख़राब कर रखा है
आज़ादी से मेरे जीने को अधूरा ख्वाब कर रखा है

जब तक यहाँ पर बेटी को यूँ ही सताया जायेगा
चाहे जितनी पूजा कर लो रामराज कभी ना आएगा

क्योंकि

लोग पूजते हैं देवियाँ और बेटियाँ दुत्कारते
कुछ नौंचते हैं सड़क पर तो कुछ गर्भ में ही मारते

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