रविवार, 24 जुलाई 2016

"सुकून"

तेरी निगाहों में सुकून मैंने पाया
जब से है तुझको ज़िंदगानी बनाया
मुहब्बत की राहों पे जो हम चले
मेरे आशियाने को जो तूने सजाया
तेरी निगाहों में सुकून जो मैंने पाया

खुशनुमा रात और तेरा साथ
हो चांदनी और तेरी बात
खुशनुमा रात और तेरा साथ
हो चांदनी और तेरी बात
मेरी जान तू ही आज मुझमे समाया
जब से है तुझको ज़िंदगानी बनाया
तेरी निगाहों में सुकूँ जो मैंने पाया
जब से है तुझको ज़िंदगानी बनाया

सारी दुनिया मैं छोड़ दूँ
तू कहे तो रुख मोड़ लूँ
साड़ी दुनिया मैं छोड़ दूँ
तू कहे तो रुख मोड़ लूँ
इन ख़्वाहिशों को मैंने यूँ ही जगाया
ये ख्वाब मैंने पलकों पे सजाया
तेरी निगाहों में सुकूँ मैंने पाया
जब से है तुझको ज़िंदगानी बनाया
मुहब्बत की राहों पे जो हम चले
मेरे आशियाने को जो तूने सजाया
तेरी निगाहों में सुकून मैंने पाया

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