हाँ आज मैं रोना चाहता हूँ
आज मैं खुद खोना चाहता हूँ
तन्हा होकर जो सीखा मैंने
उन यादों को पिरोना चाहता हूँ
हाँ आज मैं रोना चाहता हूँ
जाने क्यों रूठे हैं सब मुझसे
जाने क्यों कुछ कहते नहीं हैं
जो मैं सहता हूँ दर्द हर रोज़
वो ऐसा क्यों सहते नहीं हैं
मैं भी उनके जैसा होना चाहता हूँ
हाँ आज मैं रोना चाहता हूँ
अब कोई मुझे मनाने नहीं आता
वो साथ हैं ये बताने नहीं आता
क्या खता मैंने की ज़माने भर से
क्यों मुझको समझाने नहीं आता
मैं मौत की बाँहों में सोना चाहता हूँ
हाँ आज मैं रोना चाहता हूँ
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