रविवार, 6 नवंबर 2016

खिड़कियां

दिल के दरवाजे खोल दो सारे
बंद खिड़कियां भी खोल दो
अब तो मुहब्बत का मौसम है
ज़माने से आज ये बोल दो

लाख नफ़रतें बाँध रखी जो
ऐसी जंज़ीरें भी तोड़ दो
इंसान को इंसान से आज
इंसान बनाकर जोड़ दो
कह दो हुक्मरानों से ये भी
कि मज़हब की न दीवार है
हम हिंदुस्तानी हैं सभी
हमें इंसानियत से प्यार है
आज वफाओं का फिर से तुम
जान से भी ज्यादा मोल दो
दिल के दरवाजे खोल दो सारे
बंद खिड़कियां भी खोल दो

राम के भजन भी होएंगे अब
और अज़ान भी तो आएगी
दुःख का अँधियारा छट जायेगा
मानवता गीत बसंत गायेगी
मेरा कहना तुम मान जो लोगे
सारे कष्ट भी मिट जायेंगे
प्रेम की इस पावन भूमि में
फिर दुश्मनी नहीं पाएंगे
मेरा तेरा सब करना छोड़ के
हम से रिश्ता जोड़ लो
दिल के दरवाजे खोल दो सारे
बंद खिड़कियां भी खोल दो
     

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