रविवार, 27 नवंबर 2016

उत्सव

देश तो उत्सव मना रहा है
नयी क्रांति भी ला रहा है
किसी गरीब को भी देखो
वो भूखे बच्चे सुला रहा है

तड़प रहा है आज तक जो
क़तार में खड़ा है आदमी
अत्याचार तमाम सहकर
मज़बूरी में पड़ा है आदमी
देशभक्ति की बयार में यूँ
हँसकर मुल्क बना रहा है
देश तो उत्सव मना रहा है
नयी क्रांति भी ला रहा है

आओ इस उत्सव में हम
अपने प्राणों की आहुति दें
आज़ादी की लड़ाई की वो
फिर दिल को अनुभूति दें
लेकिन देखा जो ताज़ा हाल
लोन ले कोई उड़ा जा रहा है
देश तो उत्सव मना रहा है
नयी क्रांति भी ला रहा है

कोई क्रांति ऐसी भी आये
जिसमें गरीब भी मुस्कुराये
ना रहे भूख रोटी की चिंता
नेता भी जनता से घबराये
मेरे दिल का क्या कहूँ मैं
कैसे ख्वाब ये सजा रहा है
देश तो उत्सव मना रहा है
नयी क्रांति भी ला रहा है
                           


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