गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

चल उड़ चलिए

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए
कि अब ये देस हुआ बेगाना
चल उड़ चलिए अब कोई ठिकाना
बदला सा लगने लगा ये ज़माना
चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए
कि अब ये देस हुआ बेगाना

रिश्ते नाते सब रूठ गये हैं
सारे साथी कहीं छूट गये हैं
अपने घरोंदे अब टूट गये हैं
गुज़र गया हैं अब मौसम पुराना
चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए
कि अब ये देस हुआ बेगाना

हीरें भी रोई रांझे भी रोए
किस्से मुहब्बत के अब खोए
कौन सुनाएगा अब ये अफ़साना
चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए
कि अब ये देस हुआ बेगाना

यारी सबसे छूट रही है
वो पगडंडी टूट रही है
बंद हुआ है मेलों में जाना
चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए
कि अब ये देस हुआ बेगाना

पनघट पे आके मिलना मिलाना
मंदिर की पूजा वो अज़ान सुनाना
ताजिए बनाना वो झाँकी सजाना
चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए 
कि अब ये देस हुआ बेगाना

कोई लम्हा फिर से आए
इस दूरी को फिर से मिटाए

उस पार अपनों के गले लग जाएँ
रूठे हुओं को अब फिर से मनाएँ

फिर से वो होली ईद दीवाली
आँखों को हम कर दें खाली

बंद करो अब नफ़रत के खेले
फिर से लगाओ यारी के मेले

अपनों से जो हम दूर हुए थे
कितने हम यूँ मजबूर हुए थे

दौलत हमारी सारी ले लो
गुज़रे ज़माने वापस दे दो

मिट गये रांझे मर गयीं हीरें
ख़त्म करो अब सारी लकीरें 

फिर से हम उस घर मे जाएँ
अपना बचपन जहाँ छोड़ आए

बाँट दिया था तुमने सबको
बाँटा देस और बाँटा रब को

चलो हम फिर से एक हो जाएँ
बुजुर्गों से लाखों दुआएँ पाएँ

फिर से साथ खेतों में जाएँ
टूटी पगडंडी फिर से बनाएँ

साथ में मिलकर बस ये गाएँ
गाते ही जाएँ बस गाते हीं जाएँ

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए 
ले चलिए मुझे देस पुराना
ले चलिए मुझे देस पुराना

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