"दिल"
जल जल के आज धुआँ हो रहा है दिल
देख लो जाने क्या क्या हो रहा है दिल
कल रात चाँदनी में जो भीग कर गया
आज धूप में ठंडी हवा हो रहा है दिल
उतार कर रख दिये नक़ाब भी चेहरे से
आँखों में लेकिन हया हो रहा है दिल
हम लाख मनाने की कोशिश किया करें
मानकर भी ख़फ़ा ख़फ़ा हो रहा है दिल
इक उम्र ही गुज़ार दी जिसके इंतज़ार में
पहली मुहब्बत में वफ़ा हो रहा है दिल
इसकी हरकतों के भी शिकवे क्या कहें
बा-ख़ुदा अब तो खुदा हो रहा है दिल
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