शनिवार, 12 अगस्त 2017

बच्चे

उठिए जनाब
उठ भी जाइये
बच्चों के साथ
खुशियाँ मनाइये
आज़ादी का पर्व है
तिरंगा लहराइये
अखबार मत पढ़िए
समाचार मत सुनिये
कुछ बच्चों की करुण
पुकार गूंज रही है
अगर आपने सुनी
तो दिल संभाल नहीं पाएंगे
अपने बच्चों में
वो बच्चे नज़र आएंगे
रहने दीजिये साहब
अपनी राष्ट्रवाद की
कसौटी कसिये
आज फिर कुछ लोगों
को तौलना है
उचित अवसर देख कर
बोलना है
जो मर गए वो बच्चे ही थे
राष्ट्रवाद से अनजान
न हिन्दू न मुसलमान
वो क्या फायदा करवाएंगे
आज साठ मरे
कल छह सौ मर जायेंगे
सबको चढ़ा जापानी बुखार था
अस्पताल में हर बच्चा बीमार था
सबके बुखार एक साथ उतर गए
ऑक्सीजन की कमी से सब मर गए
आप बड़े ज्ञानी लोग हैं
बड़ी बातें बताते हैं
आपने ही बताया कि
अगस्त में बच्चे मर जाते हैं
जनता भोली है
कुछ आँसू बहायेगी
अपनी छाती पीटकर
खुद ही चुप हो जायेगी
शुक्र मनाइये हालात अच्छे थे
किसी नेता या अफसर के नहीं
वो सब गरीबों के बच्चे थे
चलिये आपको तो झंडा फहराना है
कुछ बातें सुनाकर भूल जाना है
फिर चुनाव की तैयारियाँ भी करनी है
विपक्षी नेताओं की खरीदारी भी करनी है
जिन पैसों से ऑक्सीजन नहीं खरीद पाते हैं
उन पैसों में नेता आसानी से बिक जाते हैं
क्या हुआ जो खून की खुशबू आयेगी
इसी से तो राजनीति रंग लायेगी
भूल जाएगा देश बच्चों की लाशों को
कब तक याद रखेगा टूटती साँसों को
लोग बस गायों की रक्षा करेंगे
बच्चे ऐसे ही तड़प कर मरेंगे
लेकिन माँ बस रोती रहेगी
भारत माँ भी रोती रहेगी
क्योंकि आप लोग बस राजनीति ज़िंदा रखते हैं
जिसमें कुचलकर रोज हज़ारों बच्चे मरते हैं
लेकिन याद रखना जब जनता गुस्से में आएगी
तो यही अगस्त में अगस्त क्रांति लाएगी
भूल जाएगी धर्म मजहब जाति पात को
फिर याद रखेगी आपकी हर इक बात को
फिर बच्चों की जान कोई अगस्त नहीं ले पायेगा
ऐसा लोकतंत्र आएगा कि नेता ही मारा जायेगा

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