हिमालय पर चढ़ जाओगे
या काशी काबा जाओगे
आखिरी वक्त जब आएगा
तो मुक्ति कैसे तुम पाओगे
हिसाब करोगे क्या तुम
जमीन जायदाद दौलत का
या पल कोई याद करोगे
पहली सच्ची मुहब्बत का
या अपनों की आंखों में
थोड़ा सा प्यार चाहोगे
या तन्हा ही कहीं तुम
चुपचाप से मर जाओगे
क्या तड़प तड़प कर तुम
मौत का इंतज़ार करोगे
या हंसते मुस्कुराते हुए
चैन की नींद सो जाओगे
आखिरी वक्त जब आएगा
तो मुक्ति कैसे तुम पाओगे
माला के मनकों में जो तुम
राम नाम को ही पुकारोगे
पाँचों वक़्त नमाज़ी होकर
खुदा की राह को निहारोगे
कुछ लम्हों की ज़िंदगी का
फिर से उधार मांगोगे क्या
या जितना तुम जी चुके हो
उसका कर्ज़ उतारोगे क्या
ख्वाहिश जन्नत की करोगे
या जहन्नुम से घबराओगे
हँसते हँसते जाओगे तुम
या अपना दर्द दिखाओगे
आखिरी वक्त जब आएगा
तो मुक्ति कैसे तुम पाओगे
क्या तब भी कोई ख्वाब
तुम्हारी आँखों में होगा
या सुकून का आफताब
तुम्हारी साँसों में होगा
ज़िन्दगी बीत गयी जब
शिकवे और शिकायतों में
क्या कर लोगे तब तुम
टूटती धड़कन की आहटों में
अपने लोगों से जुदाई का
क्या तुमको भी गम होगा
या दुनियादारी का तमाशा
उस वक़्त थोड़ा कम होगा
भय होगा चेहरे पर या फिर
खुशी होगी दर्द से राहत की
या तुम भी तब रो दोगे
कि किससे कितनी चाहत की
मेरी बात गर सुनना चाहो
इक बात तुमको बताऊँगा
मेरा वक़्त जब आयेगा जब
मौत को भी मैं जी जाऊँगा
क्या पता है उसके बाद
कैसा आलम कैसी दुनिया
क्या फर्क फिर मुझे पड़ेगा
जो मुझे याद करे न दुनिया
बेहतर है कि खामोशी से
थोड़ा शोर मचा जाऊँगा
आख़िरी वक़्त जो मेरा होगा
आख़िरी गीत मैं सुना जाऊँगा
फिर सोऊँगा मैं सुकून के साथ
याद आऊँगा उसी गीत के साथ
जिसमें मैं फिर से तुमको
चार बातें कह जाऊँगा
और लफ़्ज़ों में ही अक्सर
तुमको नज़र आ जाऊँगा
मेरे गीत ही हैं जो मुझको
मेरे बाद भी ज़िंदा रखेंगे
और जो मुझसे रूठे हैं
उनको भी शर्मिंदा रखेंगे
मेरा आखिरी गीत वो
सभी लोगों को मेरा प्यार है
मुक्ति गीत जिसे मैं कहता हूँ
वो मेरे जीवन का आधार है
ज़िन्दगी में साथ होती है प्रीत
आखिरी वक्त साथ मुक्ति गीत
आखिरी वक्त साथ मुक्ति गीत
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