मैं भीड़ देख चिल्लाता हूँ
चुनाव बाद छिप जाता हूँ
मैं नेता हूँ सच कहता हूँ
देश लूटने ही आता हूँ
अक्ल बड़ी या भैंस जैसे
सवालों से घबराता हूँ
अक्ल मेरे पास नहीं तो
भैंस को बड़ा बताता हूँ
मैं नेता हूँ सच कहता हूँ
सबको बकरा बनाता हूँ
सत्य अहिंसा ईमान की
कसमें खूब खाता हूँ
वोट लेने के लिए मैं तो
भाई भाई को लड़वाता हूँ
मैं नेता हूँ सच कहता हूँ
सत्य नहीं सह पाता हूँ
जाति पाती या मज़हब को
मैं चुनाव में आजमाता हूँ
और कुर्सी के आते ही मैं
जनता को भूल जाता हूँ
मैं नेता हूँ सच कहता हूँ
झूठी बातें ही बताता हूँ
जितनी चाहे नफरत करो
मुझसे तो बच ना पाओगे
चाहे जिसको वोट देना
हर रूप में मुझे जिताओगे
मैं नेता हूँ सच कहता हूँ
तुम ऐसे ही देश चलाओगे
तुम ऐसे ही देश चलाओगे
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