रविवार, 16 अक्टूबर 2016

उफ़ इश्क़

उफ़ इश्क़ और हाय हाय इश्क़
कभी हँसाये कभी रुलाये इश्क़

सारी जेबें खाली करवा दे जब
गर्लफ्रैंड को कभी घुमाये इश्क़
मिस्ड कॉल जब आये उसका
तो रात भर फ़ोन लगाये इश्क़
कभी कभी ग़र शक़ हो जाये
तो खड़ा सर को झुकाए इश्क़
उफ़ इश्क़ और हाय हाय इश्क़
कभी हँसाये कभी रुलाये इश्क़

गली गली तो पहचाने इसको
घरवाले ना समझ पाये इश्क़
जो माँ बाप भाई को पता चले
तो कुत्ते सा यूँ पिटवाये इश्क़
दिल बैरी ही ना समझे इसको
सारा ज़माना समझाए इश्क़
उफ़ इश्क़ और हाय हाय इश्क़
कभी हँसाये कभी रुलाये इश्क़

दुनिया हमसे मिलना जो चाहे
हम को दुनिया है भुलाये इश्क़
जो इश्क़ में हम क्रांति कर दें
तो पुलिस थाना घुमवाये इश्क़
दुनिया कहती गुनाह इश्क़ को
हमको भी जेल भिजवाए इश्क़
उफ़ इश्क़ और हाय हाय इश्क़
कभी हँसाये कभी रुलाये इश्क़
             

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें