गुरुवार, 1 दिसंबर 2016

कुछ भी नहीं

तू इबादत मेरी
तू ही चाहत मेरी
मैं हूँ तुझसे ही
तू मेरी ज़िन्दगी
तेरे बिन कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं
तेरे बिन कुछ भी नहीं
तू मेरी ज़िन्दगी
तेरे बिन कुछ भी नहीं
ख़ामोशी सी है ये मुहब्बत
इसको आ लफ़्ज़ों से सजा दें
बेमौसम बारिश की बूँदें
लाकर हम इसको भिगा दें
आसमान में चाँद से आगे
अपनी मुहब्बत हम पहुँचा दें
कोई हद ना रहे
ना रहे ये जमीं
कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं
तेरे बिन कुछ भी नहीं
तू मेरी ज़िन्दगी
तेरे बिन कुछ भी नहीं
जब मैं सोचूँ ज़िन्दगी क्या है
दिल में इक तेरा चेहरा है
अब मेरा मुझमेँ क्या है बाकी
रूह है तू ये दिल भी तेरा है
चाँद सितारे और रंग सारे
देखूँ जब तू मुझको दिखता है
कोई लम्हा ना हो
कोई पल भी नहीं
कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं
तेरे बिन कुछ भी नहीं
तू मेरी ज़िन्दगी
तेरे बिन कुछ भी नहीं

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