फासलों के शहर में ज़रा हिफाज़त रखना
अपने हाथ में दुनिया की क़यामत रखना
दुरंगे चेहरों से अच्छा है बचकर निकलना
मतलबी लोगों से दूर की ही आदत रखना
वैसे ज़माने के दस्तूर भी निराले लगते हैं
कभी ख़फ़ा होना कभी शिकायत रखना
अंदाज़े बयाँ लोगों के अजब अजब से हैं
जो अपने हैं उनसे तमाम अदावत रखना
सच और झूठ का फैसला खुदा पर छोड़
बेहतर है हमारा आँखों में शरारत रखना
हमारा क्या है बेहद सादे ख्वाब हैं अपने
उस एक के लिए संभाल मुहब्बत रखना
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