गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017

लोकतंत्र रो रहा होगा

तिरंगा सिसक रहा होगा
लोकतंत्र रो रहा होगा
जब संसद में कोई अपराधी
पोर्न देख रहा होगा
या चैन से सो रहा होगा

इक तरफ मुल्क में
गरीबी है और लाचारी है
वहीं हमारे नेताओं को
पैसे खाने की बीमारी है
जहाँ कोई गरीब का बच्चा
पैसे की कमी से मर रहा होगा
और अमीर सरकारी खर्चे पर
मौज मस्ती कर रहा होगा
तिरंगा सिसक रहा होगा
लोकतंत्र रो रहा होगा

जब धर्मों के चक्कर में लोग
इक दूसरे को मारेंगे
जब सत्ता के नशे में लोग
कलम पर तलवार उतारेंगे
सीमा पर खड़ा जवान जब
भूख से मर रहा होगा
खेतों में कोई मजबूर किसान
खुदख़ुशी कर रहा होगा
तिरंगा सिसक रहा होगा
लोकतंत्र रो रहा होगा

सीता, राधा, द्रोपदी, दुर्गा
सड़क पर लूटी जायेंगी
अपने हक़ में लड़ती छात्रायें
कॉलेज में जब पीटी जायेंगी
क़त्ल करने के बाद जब क़ातिल
वंदे मातरम कह रहा होगा
देशभक्ति के नाम कोई गुंडागर्दी
खुलेआम कर रहा होगा
तिरंगा सिसक रहा होगा
लोकतंत्र रो रहा होगा

आप जब शाम को घर में
चैन से रोटी खायेंगे
मुल्क के हालात पर गुस्से में
टीवी चैनल बदलते जायेंगे
सब कुछ देख कर भी जब
आपका खून नही खौलेगा
या नेताओं की भक्ति में आपका
दिल सच झूठ नहीं तौलेगा
तब
तिरंगा सिसक रहा होगा
लोकतंत्र रो रहा होगा

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