कैसा हाल ए दिल हुआ
कहना भी मुश्किल हुआ
लफ़्ज़ों से है अब दूरी
मुहब्बत का हाँसिल हुआ
तुझको सोचूँ चाहूँ मैं
लेकिन न कह पाऊँ मैं
ये जुदाई की अगन है
तुझ बिन न रह पाऊँ मैं
ख्याल हज़ारों तेरे संग
आज रंगी मैं तेरे रंग
तू जैसे डोर मेरी है
मैं बनी तेरी पतंग
क्या क्या करूँ मैं
कैसे अब रहूँ मैं
कैसा हाल ए दिल हुआ
कहना भी मुश्किल हुआ
पल पल दिल बैचेन रहे
कुछ कहे कभी चुप रहे
लाखों जतन करती मैं
तुझमें जीती मरती मैं
लम्हा लम्हा ज़िन्दगी तू
तू है खुदा और बंदगी तू
इक दिन तुझमें खो जाऊँ
मैं तो बस तेरी हो जाऊँ
तुझको मांगा रब से मैंने
वक़्त वही क़बूल हुआ
कैसा हाल ए दिल हुआ
कहना भी मुश्किल हुआ
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