खत में लिख दूँ हाल ए दिल
या तुझसे मैं मिलकर कह दूँ
आंसू मेरे तुझ को भेजूँ और
खत में अपने दिल को रख दूँ
बोल मैं तुझको कैसे दिखाऊँ
कितनी रोती हैं मेरी आँखें
एक पल भी कटता नहीं है
कैसे काटूँ मैं दिन और रातें
तुझसे जुदा होकर के जाना
ज़िन्दगी ये बहुत मुश्किल है
इतने सारे गम जो मेरे हैं
तेरी मुहब्बत का हांसिल है
तुझको खुदा कहता था मैं
बोल इबादत फिर से कर लूँ
आंसूं मेरे तुझको भेजूँ और
खत में अपने दिल को रख दूँ
मेरा तो बस ख्याल तू ही था
मेरा आखिरी सवाल तू ही था
जिसके संग हँसना और रोना
मेरा तो अच्छा हाल तू ही था
तेरे संग मैंने जीना था सीखा
मर मर के मैं पहले जीता था
कैसे तुझको आज मैं कह दूँ
अपना ज़ख्म कैसे सीता था
तू जो आज रूठा है मुझसे
फिर से उन ज़ख्मों को कुरेदू
आंसू मेरे तुझको भेजूँ और
खत में अपने दिल को रख दूँ
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