मंगलवार, 23 अगस्त 2016

"चौकीदार"

चारों ओर मचा है हाहा कार
ठप्प हुए हैं अब तो कारोबार
आया चौकीदार देखो आया चौकीदार

जिसका मन हो वो लूट रहा
देश का ताना बाना टूट रहा
लेकर नाम धर्म का अब तो
कर रहा अत्याचार
आया चौकीदार देखो आया चौकीदार

छप्पन इंच की छाती थी
बाँतें कितनी ही हाँकी थी
साम दाम दंड भेद से
अब बना रहा सरकार
आया चौकीदार देखो आया चौकीदार

जुमलों को बाज़ार में बेचा
झूठा तीर ज़ुबान से फैंका
काले धन की बात छोड़ो
सारे कर्म किये बेकार
आया चौकीदार देखो आया चौकीदार

बेटियों का मान बढ़ाना
बेटी बचाना बेटी पढ़ाना
भूल के नेता उसके
करते हैं बलात्कार
आया चौकीदार देखो आया चौकीदार

दस लाख का सूट पहनकर
गरीब का जो मजाक उड़ाया
जबरदस्ती गले पड़ पड़ कर
कैमरे से करता ऑंखें चार
आया चौकीदार देखो आया चौकीदार

चौकीदारी करने वो आया
गाय के नाम इंसान मरवाया
अपनी मर्ज़ी करके उसने
कर दी संविधान की हार
आया चौकीदार देखो आया चौकीदार
        

आवश्यक सूचना - इस कविता का किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है। अगर कोई सम्बन्ध निकले तो कृपया इसे सिर्फ एक "जुमला" समझा जाये।

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