चाँद के किसी ख्वाब की सी होती हैं रोटियां
जुगनुओं के किसी तालाब सी होती हैं रोटियां
किसी को नसीब होती हैं बड़ी मिन्नतों के बाद
किसी के लिए ज़ख्म हज़ार सी होती हैं रोटियां
कभी किसी लम्हा ये मुहब्बत बरसाती हैं खूब
तो हीर को रांझे की पुकार सी होती हैं रोटियां
लाख मिन्नतें करते लोग मंदिर ओ मस्ज़िद में
कभी खुदा कभी भगवान सी होती हैं रोटियां
लाखों लोग जो सो जाते हैं सड़क पर भूखे पेट
उनको पकवानों के ख्वाब सी होती हैं रोटियां
तुम जो फेंक दिया करते हो ये बचीं हुईं रोटियां
सोचो छोटे बच्चे के मिज़ाज़ सी होती हैं रोटियां
वो भूखे नहीं तो क्या जानेंगे कीमत रोटियों की
अँधेरी रात में कोई आफ़ताब सी होती हैं रोटियां
किसी भूखे गरीब को दो रोटी देकर तुम देखना
दिल को सुकून ए बहार की सी होती हैं रोटियां
चाँद के किसी ख्वाब की सी होती हैं रोटियां
जुगनुओं के किसी तालाब सी होती हैं रोटियां
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