रविवार, 25 सितंबर 2016

रोटियाँ


चाँद के किसी ख्वाब की सी होती हैं रोटियां
जुगनुओं के किसी तालाब सी होती हैं रोटियां

किसी को नसीब होती हैं बड़ी मिन्नतों के बाद
किसी के लिए ज़ख्म हज़ार सी होती हैं रोटियां
               
कभी किसी लम्हा ये मुहब्बत बरसाती हैं खूब
तो हीर को रांझे की पुकार सी होती हैं रोटियां

लाख मिन्नतें करते लोग मंदिर ओ मस्ज़िद में
कभी खुदा कभी भगवान सी होती हैं रोटियां

लाखों लोग जो सो जाते हैं सड़क पर भूखे पेट
उनको पकवानों के ख्वाब सी होती हैं रोटियां

तुम जो फेंक दिया करते हो ये बचीं हुईं रोटियां
सोचो छोटे बच्चे के मिज़ाज़ सी होती हैं रोटियां

वो भूखे नहीं तो क्या जानेंगे कीमत रोटियों की
अँधेरी रात में कोई आफ़ताब सी होती हैं रोटियां

किसी भूखे गरीब को दो रोटी देकर तुम देखना
दिल को सुकून ए बहार की सी होती हैं रोटियां

चाँद के किसी ख्वाब की सी होती हैं रोटियां
जुगनुओं के किसी तालाब सी होती हैं रोटियां
                

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें