तुम ख़्वाबों की रेत सी
मैं कोई बीता लम्हा हूँ
तुम भी कितनी तनहा हो
मैं भी कितना तनहा हूँ
वक़्त से खेलें आज यूँ
जैसे बच्चे का खिलौना हो
हम भी हैं तैयार यहाँ
हो जाये हो भी होना हो
कोई अपना ही दुश्मन सा
लगता मैं जैसे अँधेरा हूँ
तुम भी कितनी तनहा हो
मैं भी कितना तनहा हूँ
घाव एक से दर्द एक सा
मरहम भी एक हमारा है
ये बैरी सा वक़्त यहाँ
ज़िन्दगी ने क्यों उतारा है
सारी आरज़ू मिटाने को
जैसे मैं दर्द का पुलिंदा हूँ
तुम भी कितनी तनहा हो
मैं भी कितना तनहा हूँ
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