बुधवार, 28 सितंबर 2016

आईना

ये दिल आईना है तुझे पहचानता है
मेरी सुनता नहीं तेरी बात मानता है
ये दिल आईना है तुझे पहचानता है

सामने तेरे आते ही तुझसा लगता है
तेरे जाने पर रोता है और तड़पता है
चाहता है ये अब तेरे साये में रहना
एक पल को भी ना दूर तुझसे रहना
रात और दिन तेरा नाम पुकारता है
ये दिल आईना है तुझे पहचानता है

मेरा समझाना अब तो बेकार हुआ है
तेरी ख़ुशी दिल का कारोबार हुआ है
खरीदोगे दिल कैसे मुझे भी बताओ
जानते हो गर तरीक़ा मुझे बतलाओ
दौलत शौहरत को ये कहाँ जानता है
ये दिल आईना है तुझे पहचानता है

तोड़ देना यूँ दिल को मुनासिब नहीं है
इसकी कोई वजह भी वाजिब नहीं है
खिलौना नहीं है जो ये दूजा मिल जाये
फूल नहीं है जो हर बाग़ में खिल जाये
रस्मो रिवाजों से दिल अनजान सा है
ये दिल आईना है तुझे पहचानता है
मेरी सुनता नहीं तेरी बात मानता है
                   





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