चाँद रात में तनहा चाँद
कुछ तेरा कुछ मेरा चाँद
आठों पहर देखूँ जिसको
मेरे सनम का चेहरा चाँद
दूरी कम क्यों होती नहीं
रात भी क्यों सोती नहीं
आँखों का किस्सा जुदा
ख्वाब कोई संजोती नहीं
पानी में अक्स है दिखता
यूँ फ़लक़ से उतरा चाँद
चाँद रात में तनहा चाँद
कुछ तेरा कुछ मेरा चाँद
आसमान की बातें देखो
कैसा किस्सा है सुनाया
तारों के साथ भी होकर
क्यों तनहा चाँद बनाया
बादल के पीछे शर्मीला
कभी छुपा निकला चाँद
चाँद रात में तनहा चाँद
कुछ तेरा कुछ मेरा चाँद
आठों पहर देखूँ जिसको
मेरे सनम का चेहरा चाँद
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