जो कल के वर्तमान थे
वो आज के अतीत हैं
अजीब भेड़चाल में ये
समय क्यों व्यतीत है
कोई रंग रूप से मिला
कोई नाम पर झुका
साथियों का काफिला
अपने अंजाम पे रुका
किसी के हिस्से हार है
किसी के हिस्से जीत है
अजीब भेड़चाल में ये
समय क्यों व्यतीत है
पथिक भी थका हुआ
नाविक की हुई हार है
तूफान ज़ोर का है या
कमजोर सी पतवार है
अपने अपने शोर में ही
ढूंढते सब अपनी प्रीत है
अजीब भेड़चाल में ये
समय क्यों व्यतीत है
कितने शिक़वे ज़िन्दगी से
कितनी ही शिकायतें हैं
नफरतों के साए में पलतीं
आज यहाँ मोहब्बतें हैं
राधा कृष्ण की नगरी में
प्रेम सबसे बड़ी कुरीत है
अजीब भेड़चाल में ये
समय क्यों व्यतीत है
- इश्क़
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