इन दूरियों को कभी तो तुम मिटाया करो
जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो
यूँ ना मेरी बेकरारी को तुम आजमाया करो
जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो
कभी जब तन्हाई में मुझे तुम्हारा सहारा मिला
तो लगा कि दरिया-ए-दिल को किनारा मिला
जैसे मेरे जज़्बातों को तुमसे मिली मंज़िल कोई
जैसे मिल गया हो मेरी तन्हाई को हाँसिल कोई
अब ना ख़ामोश रहकर मुझे यूँ तडपाया करो
जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो
हर दर्द से जीता हूँ मैं ये दिल तुमपर हारकर
कोई और चाहत नहीं मेरी तुम्हें ज़िंदगी मानकर
हर किसी पर किए ज़िंदगी ने लाखों सितम
हालातों ने भी यहाँ नवाज़ें हैं सभी को गम
इन हालातों के आगे तुम ना टूट जाया करो
जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो
हम दोनों ने ज़िंदगी मे बेपनाह अश्क़ बहाए थे
शायद ही कोई लम्हा हम दिल से मुस्कुराए थे
थामा है तुम्हारा हाथ ज़िंदगी भर निभाने के लिए
आया हूँ मैं अब तुम्हें कभी ना छोड़ जाने के लिए
मेरी बाहों मे आकर तुम सारे गम भूल जाया करो
जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो
इन दूरियों को कभी तो तुम मिटाया करो
जब भी दिल चाहे मेरे पास चले आया करो
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