ज़िंदगी तमाम होने आई पर मुक़द्दर ये समझ ना पाया
हर उस शख़्स ने धोखा दिया जिससे भी मैने दिल लगाया
सुना है मैनें किस्मत से मिलती है मुहब्बत सभी को
इस कम्बख़्त मुहब्बत ने मुझे हर कदम पर ठुकराया
जब दौलत लेकर खोजने गया तो मिले मुझे यार बहुत
जब वफ़ा की ख़्वाहिश की तो मैं खुद बेवफा कहलाया
कहते हैं आईना दिखा देता है हर चेहरे की हक़ीकत
आज यहाँ हर शख़्स ने आईने पर इल्ज़ाम लगाया
मुस्कुराहट भी रोई जब भी टूटा यहाँ दिल किसी का
पुराने ज़ख़्म भुलाने के लिए हर बार नया दर्द लगाया
पत्थर बना कर इंसान को तू तो हंसता होगा हर रोज
क्या चाह भी तेरी थी जो तूने हम सबको बेबस बनाया
ए खुदा, दर्द भी तू दे हमें फिर दुआ भी हम तुझसे करें
हर दिन हर पल हर कदम मैनें भी तुझे आजमाया
जो चाहे सज़ा दे दे मुझे मंजूर है अब सब कुछ
देखी है मैनें तेरी खुदाई कई बार ओ मेरे ख़ुदाया
वो होंगे कोई और जो करते हैं तेरे आगे सजदा
कूचा ए इश्क़ में मैनें हर बार अपना सिर झुकाया.
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