बुधवार, 2 मार्च 2016

चल उड़ चलिए

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

चल उड़ चलिए अब कोई ठिकाना

बदला सा लगने लगा ये ज़माना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

रिश्ते नाते सब रूठ गये हैं

सारे साथी कहीं छूट गये हैं

अपने घरोंदे अब टूट गये हैं

गुज़र गया हैं अब मौसम पुराना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

हीरें भी रोई रांझे भी रोए

किस्से मुहब्बत के अब खोए

कौन सुनाएगा अब ये अफ़साना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

यारी सबसे छूट रही है

वो पगडंडी टूट रही है

बंद हुआ है मेलों में जाना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए

कि अब ये देस हुआ बेगाना

पनघट पे आके मिलना मिलाना

मंदिर की पूजा वो अज़ान सुनाना

ताजिए बनाना वो झाँकी सजाना

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए 

कि अब ये देस हुआ बेगाना

कोई लम्हा फिर से आए

इस दूरी को फिर से मिटाए

उस पार अपनों के गले लग जाएँ

रूठे हुओं को अब फिर से मनाएँ

फिर से वो होली ईद दीवाली

आँखों को हम कर दें खाली

बंद करो अब नफ़रत के खेले

फिर से लगाओ यारी के मेले

अपनों से जो हम दूर हुए थे

कितने हम यूँ मजबूर हुए थे

दौलत हमारी सारी ले लो

गुज़रे ज़माने वापस दे दो

मिट गये रांझे मर गयीं हीरें

ख़त्म करो अब सारी लकीरें 

फिर से हम उस घर मे जाएँ

अपना बचपन जहाँ छोड़ आए

बाँट दिया था तुमने सबको

बाँटा देस और बाँटा रब को

चलो हम फिर से एक हो जाएँ

बुजुर्गों से लाखों दुआएँ पाएँ

फिर से साथ खेतों में जाएँ

टूटी पगडंडी फिर से बनाएँ

साथ में मिलकर बस ये गाएँ

गाते ही जाएँ बस गाते हीं जाएँ

चल उड़ चलिए चल उड़ चलिए 

ले चलिए मुझे देस पुराना

ले चलिए मुझे देस पुराना

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