ज़िंदगी से मैं हार गया मौत भी मुझसे जीत गयी
बाकी जो थी मेरी साँसें जाने कैसे बीत गयी
माँगी थी जो चंद साँसें सोचा साथ निभाएँगी
मालूम ना था बेवफा हैं मुझको वो ठुकराएँगी
सुनकर ज़ख़्मो की कहानी दर्द भी आज शर्मिंदा है
सोच रही है दुनिया सारी इस हाल में कैसे ज़िंदा है
जबसे हुए हैं अपने पराए अपनो की भी प्रीत गयी
बाकी जो थी मेरी साँसें जाने कैसे बीत गयी
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