शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

मेरे बाद

मैं आज हूँ मैं कल न रहूँ
मैं याद बनकर बहता रहूँ
क्या रह जायेगा बाद मेरे
क्या रह जायेगा बाद मेरे

चंद किताबें पुरानी सी
और कुछ पुराने से नगमे
उनको तुम पढ़ लेना कभी
देखोगे फिर ये ज़िन्दगी
जो इतनी मुश्किल होती है
बात बात पर ये तो रोती है
लोग ज़िन्दगी कैसे जीते हैं
और कैसे हँसते रहते हैं
मैं आज हूँ मैं कल न रहूँ
बस याद बनकर बहता रहूँ

उम्मीदों के आसमान का
जो रंग गुलाबी लगा मुझे
फूलों के साये में छुपकर
कोई कांटा सा चुभा मुझे
ज़ख्मों ने चूमा मुझको भी
और दर्द ने लगाया गले
जो बातें हों कर लो आज
क्या पता कल हम न मिलें
मैं आज हूँ मैं कल न रहूँ
बस याद बनकर बहता रहूँ

जो मुहब्बत की कहानी थी
ज़माने को आज़मानी थी
वफ़ा के तराजू पर दिल रखा
जुदाई का ज़हर भी हमने चखा
चलो कि अब तुमसे मिलूँगा मैं
इन आसमानों के पार कहीं पर
रह जानी है तुम्हारे साथ में
मेरी ये सारी यादें यहीं पर
मैं आज हूँ मैं कल न रहूँ
बस याद बनकर बहता रहूँ

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