ये शहर इंसानों की बस्ती है
यहाँ ज़िन्दगी बेहद सस्ती है
चंद सिक्कों में बिका करती है
कभी भूखी ही मरा करती है
यहाँ जो उपलब्ध भीड़ तंत्र है
वो क़त्ल करने का षडयंत्र है
राजनीति के हाथ की गोटी है
नेताओं की नीयत बस खोटी है
ये जो सामने पड़ा है निष्प्राण सा
कुछ देर पहले था जो इंसान सा
अभी भीड़ के हत्थे चढ़ गया
कुछ देर में ही ये तो मर गया
ये अभी आया था ईद मनाने को
अपने बच्चों के लिए कुछ लाने को
भीड़ ने मज़हब के नाम पर मारा है
जाने किस बात का गुस्सा उतारा है
आजकल मुल्क में यही हालात है
लोगों का मुद्दा बस मज़हब की बात है
ये भीड़ जो मज़हब जात ढूंढती है
इंसानों की अब औकात ढूंढती है
क़त्ल करने में तो माहिर हो गयी है
नेताओं की मंशा जाहिर हो गयी है
इंसान होना अब इंसान नही होता
दूसरे इंसान में तो प्राण नहीं होता
जिसका दिल करे उसको मारिये
नफ़रत को अब खून से संवारिये
खून है जो अब थैलियों में बिकता है
बस अब ज़िंदा लोगों में न दिखता है
आपके अंदर तो बस पानी भरा है
जो भी यहाँ भीड़ बन कर खड़ा है
चलो कि आज भीड़ को तौला जाये
इनके नेता को कुछ तो बोला जाये
मैं इनकार करता हूँ आज झुकने से
मुझको डर नही कोई अब मरने से
मैं खून ए हिंदुस्तान हूँ चुप नहीं रहूँगा
अन्याय न कभी सहा है न कभी सहूँगा
ये जो हाथ मे तुमने तिरंगा थामा है
ये इस मुल्क की एकता का नामा है
तुम खुद ही तिरंगे को नहीं पहचानते
हथियार समझ कर लोगों को मारते
चलो कि आज मैं आ गया हूँ सामने
आपके खंजर अपने दिल पर थामने
तुम जो मेरे मुल्क में आतंक फैलाते हो
जाने किस मुँह से वंदे मातरम गाते हो
बेशर्म हो अपनी गलती मानते भी नहीं
अपने ही वतन को पहचानते भी नहीं
ये मुल्क जो लोगों के दिलों में बसता है
तुम्हारा खंजर उनके दिल मे उतरता है
मैं आज बतला रहा हूँ तुमको ये बात
जरा गौर से सुनना रख दिल पे हाथ
ये जो तुम ऐसे मारते हो किसी इंसान को
गौर से देखो तुम मार रहे हिंदुस्तान को
अगर हो जरा सी शर्म तो आगे आओ
अपना खंजर आज मेरे दिल पे चलाओ
मैं इश्क़ हूँ नफरत को मिटा जाऊँगा
क़त्ल हो होकर भी मैं मर नहीं पाउँगा
इश्क़ ही तो हिंदुस्तान का आधार है
इसके बिना सब कुछ अत्याचार है
नफरतों को जीतना है तो दिल मे आइये
इश्क़ रखिये साथ में और मुस्कुराइये
भीड़ बन कर बस अपने हक़ के लिए लड़ो
ये राजनीति के चक्कर में ऐसे तो न पड़ो
राजनीति ने आज मुल्क को बर्बाद किया
लूट कर गरीब को तिजोरी को आबाद किया
उम्मीद है कि फिर कोई भगत सिंह आएगा
फिर से रंग दे बसंती मुल्क में वो गायेगा
समझायेगा तुमको हिंदुस्तान की अवधारणा
उसको दुश्मन समझ कर तुम उसे न मारना
आज मुल्क की जरूरत स्कूल अस्पताल है
जरा देख लो गरीब कितना आज बेहाल है
बच्चे हैं मरते अस्पताल में गैस के अभाव में
आपस में लोग लड़ रहे हैं धर्म और गाय में
मंदिर नहीं मस्ज़िद नहीं सोच लो क्या चाहिये
जाति धर्म पर लड़ना है या आज़ाद हवा चाहिये
कहीं जुनैद मर रहे हैं कहीं पंडित मारे जा रहे
किस बात का जश्न आज हम लोग मना रहे
आज मरा कोई गैर कल तुम्हारा नंबर आएगा
आग में घिरा हुआ आखिर कब तक बच पायेगा
तालिबानी सोच है जो वो दुश्मन है विकास की
सोच लो तुम क्या तुम्हें जरूरत है विनाश की
बेहतर है आज फ़िर हम लड़े एक होने के लिये
वरना कल कोई न बचेगा हम पर रोने के लिये
हम अगर शरीर हैं तो ये मुल्क हमारी जान है
चाहे कोई भी जाति है या हिन्दू मुसलमान है
एक ही हैं हम सभी और एक ही पहचान है
मैं भी हिंदुस्तान हूँ और तू भी हिंदुस्तान है
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