बढ़ती जाये है महंगाई
भैया अब तो शामत आई
अब जीना हुआ मुश्किल
कहाँ हैं अच्छे दिन
कहाँ हैं अच्छे दिन
कहाँ हैं अच्छे दिन कहाँ हैं अच्छे दिन
आज की हालत क्या कहें
न दवा और न खाना मिलता
जो भी हम कमा के लायें
टैक्स बनजेब से निकलता
बच्चों की पढ़ाई भी ऐसी
महँगाई की परिभाषा जैसी
गैस भी महँगी तेल भी महँगा
रेल वाला खेल भी महँगा
मंत्री जी से विनती करें तो
हमको तो दिखाएं वो ठेंगा
ऐसी हालत में है देश
और खतरे में है दिल
कहाँ हैं अच्छे दिन
कहाँ हैं अच्छे दिन
कहाँ हैं अच्छे दिन कहाँ हैं अच्छे दिन
नोटबंदी करके देखो
कालाधन सफेद बनाया
विदेश जाकर साहब ने
मुल्क़ का मजाक उड़ाया
खुलने लगी है जब से पोल
बजाने लगे गये वो तो ढोल
गाय बच गयी लोग मर गये
गुंडे जब से कुर्सी चढ़ गए
खाना पीना अब इनकी मरज़ी
हगना धोना कहें जब सर जी
जी एस टी लगाई हम पर
बढ़ा दिए सब बिल
कहाँ हैं अच्छे दिन
कहाँ हैं अच्छे दिन
कहाँ हैं अच्छे दिन कहाँ हैं अच्छे दिन
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