दर्द का पानी गहरा नीला
और इश्क़ का रंग सुनहरा
ज़माने की मुश्क़िलात हैं
इश्क़ बड़ी दूर की बात है
चेहरों पर चेहरे हैं सजते
वाह वाह क्या नक्काशी है
दुनियादारी के इस खेल में
इश्क़ ही तो काबा काशी है
राहों पर नज़र और बेखबर
हालात ख़िलाफ़ रहगुज़र
इश्क़ की राह में आजकल
लोग कभी इधर कभी उधर
चलना इश्क़ राह संभलकर
क़दम क़दम पर ख़तरा है
दोतरफ़ा तलवार है दुनिया
जिससे अपना झगड़ा है
ज़िन्दगी से अब नाराज़गी
मौत ही दूर करवायेगी
जिसकी बाहों में सोकर के
मेरी रूह सुकून पायेगी
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