पहले शहर में नौकरी और मकान किया जाये
हो सके तो इश्क़ इसी दरमयान किया जाये
मुहब्बत बड़ी महँगी है आज कल के दौर में
यूँ ही आज़मा कर क्यों नुकसान किया जाये
बटुए में नहीं अब कार्डों में वजन दिखता है
कमा कर कार्ड खुद का सम्मान किया जाये
मेरी बच्चे सी तनखा उनके खर्चे शाही जैसे
डबल शिफ्ट से पूरा हर अरमान किया जाये
दौर गुज़र गये खुद को खतों में लिखने के
अब इंटरनेट पर ही दर्द बखान किया जाये
उनको जान कहना तो अब पुरानी बात हुई
अंग्रेजी में न कहो तो अपमान किया जाये
बैंकों की देनदारियाँ और किश्तों में प्यार
और कैसे ज़िन्दगी को हलाकान किया जाये
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें