बुधवार, 17 मई 2017

हालात

ये क्या तमाशा हो रहा है आज भरे बाजार में
दिख रहा है लहू आज कातिल की तलवार में

जरा गौर से देखो तो नज़र आएगा दुश्मन भी
जाने कबसे छुपा बैठा है वो लिबास ए यार में

तारीखों की हिफाज़त किसके हाथ सौंप दी
इक चोर ही नज़र आता है आपके थानेदार में

गरीबों को तो एक निवाला भी मयस्सर नहीं
दौलत लुटा रहा है मुल्क़ सौदा ए हथियार में

जिनसे बचाने को लड़ी जंग ए आज़ादी कभी
वो लुटेरे दिख रहे हैं आज घर के पहरेदार में

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