लचर है कानून और जंग लगी तलवार है
आज बुराई से लड़ने को ऐसा हथियार है
खुद कोई काम ठीक से करते नहीं हैं वो
यूँ कहते हैं कि आजकल वक़्त बेकार है
तुम यूँ ही अपनी महफिलें सजाए रहना
और दरवाजे पर खड़ा दुश्मन तैयार है
रोटियों की बात अब तो बेमानी सी हुई
मजहब के नाम क्यों मर रहा परिवार है
बह रहा है लहू अब हर गली हर शहर में
और चैन से सो रही मुल्क़ की सरकार है
- हिमांशु "इश्क़"
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