सोमवार, 29 मई 2017

सच


लचर है कानून और जंग लगी तलवार है
आज बुराई से लड़ने को ऐसा हथियार है

खुद कोई काम ठीक से करते नहीं हैं वो
यूँ कहते हैं कि आजकल वक़्त बेकार है

तुम यूँ ही अपनी महफिलें सजाए रहना
और दरवाजे पर खड़ा दुश्मन तैयार है

रोटियों की बात अब तो बेमानी सी हुई
मजहब के नाम क्यों मर रहा परिवार है

बह रहा है लहू अब हर गली हर शहर में
और चैन से सो रही मुल्क़ की सरकार है

                        - हिमांशु "इश्क़"

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