बुधवार, 31 मई 2017

मर जाऊँगा

जितना मुझको तुम चाहोगे
उतना मैं जी पाउँगा
जितना मुझसे तुम रूठोगे
उतना मैं मर जाऊँगा

कह न सकूँ मैं कितना बैचेन
दिल रहता है तुम्हारे बिना
इक इक लम्हा अब तो है
कटना मुश्किल तुम्हारे बिना
साँसें भी तो आती नहीं
और जान भी जाती नहीं
तुम्हारी मोहब्बत में क्या क्या
अब मैं कर जाऊँगा
जितना मुझसे तुम रूठोगे
उतना मैं मर जाऊँगा

मेरी चाहत मेरी राहत और
तुम ही तो हो मेरा सुकून
मेरे लिए ये दुनिया क्या है
तुम ही तो हो मेरा जुनून
कह भी न पाऊँ
रह भी न पाऊँ
तुम जो मुझसे दूर हुए तो
मैं यूँ बिखर जाऊँगा
जितना मुझसे तुम रूठोगे
उतना मैं मर जाऊँगा
जितना मुझको तुम चाहोगे
उतना मैं जी पाउँगा
जितना मुझसे तुम रूठोगे
उतना मैं मर जाऊँगा


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