बुधवार, 3 मई 2017

एक मैं हूँ यहाँ

एक मैं हूँ यहाँ
एक तू है यहाँ
आज पूरा चाँद
पूरा है आसमाँ
एक मैं हूँ यहाँ
एक तू है यहाँ

रात की तन्हाई
यूँ ही सताती है
ये तेरी याद भी
अक्सर आती है
तुझको देखूँ मैं
तुझको सोचूँ मैं
चुप चुप के ही
तुझको चाहूँ मैं
ऐसी मुहब्बत
यूँ मिलेगी कहाँ
यूँ मिलेगी कहाँ
आज पूरा चाँद
पूरा है आसमाँ

सच कर दूँ मैं
तेरे ख्वाबों को
ढूंढ लाऊँगा मैं
सब जवाबों को
तेरा ही तो हूँ मैं
ये वादा करता हूँ
तेरे संग जीता हूँ
तुझ बिन मरता हूँ
तू मेरा रास्ता
तू मेरी मंज़िल
तुझ बिन मुश्किल
मैं जाऊँ कहाँ
मैं जाऊँ कहाँ
आज पूरा चाँद
पूरा है आसमाँ
एक मैं हूँ यहाँ
एक तू है यहाँ
   - हिमांशु "इश्क़"                  

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